Meera Ban Jaun
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Beschreibung
Produktdetails
Format
ePUB
Kopierschutz
Ja
Family Sharing
Ja
Text-to-Speech
Ja
Erscheinungsdatum
09.10.2026
Verlag
AC PublishingSeitenzahl
(Printausgabe)
Dateigröße
530 KB
Sprache
Hindi
EAN
9798237625509
यह काव्य-संग्रह "मीरा बन जाऊँ" गजेंद्र योगी 'विराटिया' द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील कृति है। इस संग्रह में कुल सत्तर कविताएँ संकलित हैं, जिन्हें छह प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया हैप्रेम एवं अनुराग, विरह एवं वेदना, आत्म-संवाद एवं अंतर्यात्रा, सामाजिक यथार्थ एवं परिवेश, जीवन-दर्शन एवं जीवन-बोध, तथा ईश्वर से मिलन। पुस्तक के शुरुआती खंडों में मानवीय भावनाओं, प्रेम की कोमलता, और उसके बिछड़ने पर उत्पन्न होने वाली विरह की टीस को बड़े ही मार्मिक ढंग से उकेरा गया है। आत्म-संवाद खंड में कवि खुद से और अपने भीतर की दुनिया से रूबरू होते हैं, जहाँ जीवन की नश्वरता और मिट्टी के शरीर की वास्तविक सच्चाई पर गहराई से विचार किया गया है। सामाजिक यथार्थ खंड के अंतर्गत आज के परिवेश के पाखंड, कलयुग के प्रभाव, और मानवीय संवेदनाओं के क्षरण पर तीखा और यथार्थवादी प्रहार किया गया है। इसके साथ ही, जीवन-दर्शन और ईश्वर से मिलन वाले अंतिम खंडों में भौतिक सुखों और माया-मोह से ऊपर उठकर प्रभु-भक्ति में लीन होने की प्रेरणा दी जाती है, जिसका समापन शीर्षक कविता "मीरा बन जाऊँ" से होता है। समग्रतः, यह पुस्तक केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन, समाज और अध्यात्म की एक गहरी अंतर्यात्रा है।
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